समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने मंगलवार को संसद में NEET पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि सरकार को झुकना पड़ा क्योंकि आंदोलन करने वाले छात्र थे। अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को लोकतांत्रिक तरीके से सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने छात्रों के आंदोलन की सराहना करते हुए कहा कि यह एक मजाक के तौर पर शुरू हुआ था और एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन बन गया। संसद में गूंजा NEET पेपर लीक का मुद्दा लोकसभा में एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन के विधेयक पर चर्चा के दौरान, सपा सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण ही सरकार को झुकना पड़ा और उनकी मांगों को स्वीकार करना पड़ा। अखिलेश यादव ने कहा कि उन्होंने पहले भी ऐसे समय देखे हैं जब इस सरकार ने लोगों को विरोध करने की भी अनुमति नहीं दी थी। उन्होंने छात्रों की आंदोलन की क्षमता की प्रशंसा की, यह कहते हुए कि उन्होंने इस सरकार को भी लोकतांत्रिक बना दिया है क्योंकि उन्हें विरोध की अनुमति देनी पड़ी। छात्रों के आंदोलन की ताकत अखिलेश यादव ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन न केवल पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्रित था, बल्कि शिक्षा प्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं के खिलाफ एक व्यापक आवाज बन गया था। सपा प्रमुख ने कहा कि जब छात्र सड़कों पर उतरते हैं और अपनी आवाज उठाते हैं, तो सरकार को उनकी बात सुननी पड़ती है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र की जीत है कि सरकार को छात्रों की मांगों के आगे झुकना पड़ा। उन्होंने कहा, "सरकार भी झुकती है, झुकाने वाला चाहिए।" यह टिप्पणी उन्होंने इस ओर इशारा करते हुए की कि जब तक मजबूत विपक्ष और जागरूक जनता सरकार पर दबाव नहीं बनाती, तब तक सरकार अपनी मनमानी करती रहती है। अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि छात्रों ने न केवल अपनी मांगों को मनवाया, बल्कि सरकार को यह भी सिखाया कि लोकतंत्र में जनता की आवाज को अनसुना नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह एक बड़ी उपलब्धि है कि छात्रों के आंदोलन ने एक ऐसे मुद्दे को उठाया जिसने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया था। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर सवाल NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर भी अखिलेश यादव ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह इस्तीफा केवल एक औपचारिकता है और असली जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार केवल छोटे अधिकारियों पर कार्रवाई करके मामले को दबाने की कोशिश कर रही है, जबकि असली दोषी अभी भी बच रहे हैं। अखिलेश यादव ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। उन्होंने कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि क्या केवल मंत्री के इस्तीफे से छात्रों को न्याय मिल जाएगा? उन्होंने कहा कि जब तक परीक्षा प्रणाली में सुधार नहीं होता और पारदर्शिता नहीं आती, तब तक छात्रों का सरकार पर भरोसा नहीं जमेगा। अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी हमेशा छात्रों और युवाओं के हितों की लड़ाई लड़ेगी और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ एक शुरुआत है और अगर सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो वे सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हटेंगे। इस पूरे मामले में, अखिलेश यादव के बयान ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए छात्रों के आंदोलन को एक बड़ी जीत बताया है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर आगे क्या प्रतिक्रिया देती है और NEET पेपर लीक मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है। रामपुर में भी इस मुद्दे पर छात्रों और अभिभावकों के बीच काफी चर्चा है, जो शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।