देश की राजनीति में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए लाए गए महाभियोग प्रस्ताव को राज्यसभा और लोकसभा दोनों स्तरों पर खारिज कर दिया गया है। राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने 63 राज्यसभा सांसदों द्वारा दिए गए नोटिस को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। यह निर्णय Judges (Inquiry) Act, 1968 की धारा 3 के तहत लिया गया है, जिसके अनुसार ऐसे प्रस्तावों की प्रारंभिक जांच और स्वीकार्यता का अधिकार पीठासीन अधिकारियों के पास होता है। जानकारी के मुताबिक, कुल 193 सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने इस महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए थे। यह नोटिस 12 मार्च 2026 को राज्यसभा सभापति को सौंपा गया था। गौरतलब है कि आज़ादी के बाद यह पहला मौका है जब किसी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद में इस तरह का प्रयास किया गया। क्यों है यह मामला खास? पहली बार किसी CEC के खिलाफ महाभियोग की कोशिश दोनों सदनों के प्रमुखों ने प्रस्ताव खारिज किया संवैधानिक प्रक्रिया और शक्तियों पर चर्चा तेज