नई दिल्ली: दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल के पास एक दिल दहला देने वाली घटना में, 49 वर्षीय एक सड़क विक्रेता की मामूली कहासुनी के बाद बेल्ट से गला घोंटकर हत्या कर दी गई। यह घटना 23 जुलाई की रात को एम्स मेट्रो स्टेशन के पास हुई, जहाँ राहगीरों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। मृतक की पहचान मनोज सिंह के रूप में हुई है, जो बिहार के नवादा जिले के माई गांव का मूल निवासी था और पिछले करीब दो दशकों से सफदरजंग अस्पताल के गेट नंबर 3 के बाहर कपड़े बेचकर अपना जीवन यापन कर रहा था। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि यह घटना 23 जुलाई की रात को एम्स मेट्रो स्टेशन के पास औंरगजेब रोड पर हुई। हौज़ खास पुलिस स्टेशन को एक झगड़े की सूचना मिली थी, जिसके बाद पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और घायल सिंह को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह घटना पास के एक बस स्टैंड पर हुई एक छोटी सी मौखिक बहस से शुरू हुई थी, जो बाद में शारीरिक लड़ाई में बदल गई। घटना का विस्तृत विवरण मृतक के बेटे बिट्टू कुमार ने बताया कि उसके पिता पिछले लगभग 20 वर्षों से सफदरजंग अस्पताल के बाहर सड़क पर कपड़े बेचने का काम कर रहे थे। उन्होंने बताया कि 23 जुलाई की रात करीब 10 बजे जब उनके पिता दिन भर का काम समेटकर घर लौट रहे थे, तभी मेट्रो स्टेशन के पास एक नशे में धुत व्यक्ति ने जानबूझकर उन्हें धक्का दिया और झगड़ा करना शुरू कर दिया। बिट्टू के अनुसार, उनके पिता ने टकराव से बचने की कोशिश की और आगे बढ़ गए, लेकिन वह व्यक्ति उनका पीछा करता रहा, उसने अपनी बेल्ट उतारी और पीछे से उनका गला घोंट दिया। बिट्टू ने आगे बताया कि घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया, जबकि उनके पिता, जो बेहोश हो गए थे, उन्हें अस्पताल ले जाया गया। उन्होंने बताया कि उन्हें घटना की जानकारी उसी रात करीब 11 बजे मिली। उनके पिता पिछले 20 सालों से सड़क किनारे कपड़े बेचकर ही अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। यह घटना दिल्ली में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, जहाँ एक आम आदमी अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए मेहनत कर रहा था और उसे इस तरह अपनी जान गंवानी पड़ी। आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान लोकेश (40) के रूप में हुई है, जो तैमूर नगर का निवासी है। उसे घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया गया है। राहगीरों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने आरोपी को भागने का मौका नहीं दिया और उसे तुरंत पुलिस के हवाले कर दिया गया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे आम नागरिक भी अपराध के खिलाफ खड़े होकर न्याय दिलाने में मदद कर सकते हैं। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ हौज़ खास पुलिस स्टेशन में हत्या का मामला दर्ज कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह पूरा विवाद एक मामूली कहासुनी से शुरू हुआ था। आरोपी लोकेश संभवतः नशे की हालत में था और उसने पीड़ित मनोज सिंह से किसी बात पर बहस की। यह बहस इतनी बढ़ गई कि आरोपी ने आवेश में आकर अपनी बेल्ट से मनोज सिंह का गला घोंट दिया। इस घटना ने एक बार फिर दिल्ली की सड़कों पर सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो फुटपाथों पर अपना व्यवसाय करते हैं। कानून व्यवस्था और भविष्य की चिंताएं यह घटना दिल्ली में बढ़ते अपराधों की ओर इशारा करती है, जहाँ मामूली विवाद भी जानलेवा साबित हो रहे हैं। मनोज सिंह जैसे मेहनती और ईमानदार लोग जो फुटपाथों पर अपनी आजीविका कमाते हैं, वे अक्सर असुरक्षित महसूस करते हैं। इस तरह की घटनाएं न केवल पीड़ितों के परिवारों को तबाह करती हैं, बल्कि समाज में भय और असुरक्षा का माहौल भी पैदा करती हैं। पुलिस प्रशासन से उम्मीद की जाती है कि वे इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे और दोषी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाएंगे ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। सड़क विक्रेताओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर भी यह घटना एक महत्वपूर्ण सवाल उठाती है। उन्हें अक्सर अतिक्रमण विरोधी अभियानों का सामना करना पड़ता है, लेकिन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए जाते। इस दुखद घटना के बाद, यह आवश्यक है कि सरकार और स्थानीय प्रशासन सड़क विक्रेताओं के लिए एक सुरक्षित वातावरण बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएं। रामपुर जैसे शहरों में भी, जहाँ फुटपाथों पर व्यवसाय आम है, इस तरह की घटनाओं से सबक लेने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में ऐसे अपराधों को रोका जा सके।