मुंबई में एक अहम फैसले में Bombay High Court ने फहीम अंसारी की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने आजीविका के लिए ऑटो-रिक्शा चलाने हेतु पुलिस क्लियरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) जारी करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति एएस गडकरी और न्यायमूर्ति रंजीत सिन्हा भोंसले की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्राधिकरण का निर्णय पूरी तरह उचित है और इसमें किसी प्रकार की दखल की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पीसीसी एक महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि व्यक्ति का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ गंभीर आरोपों का इतिहास रहा है, तो प्राधिकरण को सतर्कता बरतने का अधिकार है। जानकारी के अनुसार, फहीम अंसारी ने जनवरी 2025 में क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) से बैज और परमिट के लिए आवेदन किया था, जिसके लिए पीसीसी अनिवार्य था। लेकिन उसका आवेदन खारिज कर दिया गया, जिसके बाद उसने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिकारियों ने एक सूचना के अधिकार आवेदन के जवाब में बताया था कि Lashkar-e-Taiba से कथित संबंधों के आरोपों के चलते उसे पीसीसी जारी नहीं किया जा सकता। यह फैसला यह दर्शाता है कि भले ही कोई व्यक्ति अदालत से बरी हो जाए, लेकिन सुरक्षा और पृष्ठभूमि के आधार पर प्रशासनिक निर्णय अलग हो सकते हैं।