रामपुर न्यूज़
राजनीति Rampur News Desk • 2026-10-05T13:20:58.356+00:00

बरेली राज्यसभा टिकट: श्रुति गंगवार के नाम से सियासी हलचल

बरेली और लखनऊ के सियासी गलियारों में पिछले कई दिनों से राज्यसभा टिकट को लेकर विभिन्न नामों की चर्चाएं चल रही थीं। हर कोई अपने-अपने समीकरणों के अनुसार कयास लगा रहा था, लेकिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सूची जारी होते ही सभी की निगाहें श्रुति गंगवार के नाम पर टिक गईं। इस अप्रत्याशित नाम के सामने आने से सियासी चर्चाओं का रुख पूरी तरह से बदल गया है और बरेली की राजनीति में एक नई हलचल देखने को मिल रही है। श्रुति गंगवार का नाम सामने आते ही बरेली की राजनीति में खुशी, चर्चा और कुछ हद तक मायूसी—तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जिन लोगों और उनके समर्थकों को टिकट मिलने की प्रबल उम्मीद थी, उन्हें अब इंतजार के बाद निराशा हाथ लगी है, जिससे राजनीतिक समीकरणों पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। बरेली की राजनीति में नया मोड़ श्रुति गंगवार का राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर चुना जाना बरेली की राजनीति के लिए एक बड़ा सरप्राइज साबित हुआ है। कई वरिष्ठ नेताओं और चर्चित चेहरों के बीच अचानक उनका नाम सामने आना कई राजनीतिकारों के लिए किसी झटके से कम नहीं था। कुछ राजनीतिक खेमों में जहां इस फैसले को लेकर खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं दूसरी ओर, टिकट की उम्मीद लगाए बैठे अन्य नेताओं के समर्थक इस नए समीकरण को समझने की कोशिश में जुट गए हैं। इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि भाजपा ने उम्मीदवार चयन में कुछ ऐसे समीकरणों को साधा है, जिनके बारे में व्यापक रूप से अंदाजा नहीं लगाया जा रहा था। यह स्थिति बरेली के राजनीतिक परिदृश्य में एक नया अध्याय जोड़ती है, जहां भविष्य की राजनीतिक चालों पर अब सबकी नजरें टिकी रहेंगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि श्रुति गंगवार के नाम के चयन के पीछे पार्टी का कोई विशेष सामाजिक या राजनीतिक गणित हो सकता है। हालांकि, भाजपा की ओर से उम्मीदवार चयन के किसी भी जातीय कारण को आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक जानकार इसे कुर्मी समाज के प्रतिनिधित्व और अन्य सामाजिक समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का बरेली और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी के जनाधार पर क्या प्रभाव पड़ता है। राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा तेज है कि क्या यह कदम पार्टी के लिए दीर्घकालिक रूप से फायदेमंद साबित होगा या यह केवल एक अल्पकालिक राजनीतिक दांव है। संतोष गंगवार परिवार का प्रभाव श्रुति गंगवार की सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान उनके परिवार से जुड़ी हुई है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री और वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल के पद पर आसीन संतोष गंगवार की बेटी हैं। संतोष गंगवार का बरेली की राजनीति में एक लंबा और महत्वपूर्ण राजनीतिक सफर रहा है। उन्होंने कई बार बरेली से लोकसभा चुनाव जीता है और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे हैं। ऐसे में, उनकी बेटी का राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनना बरेली की सियासत में स्वाभाविक रूप से चर्चा का एक बड़ा विषय बन गया है। यह माना जा रहा है कि संतोष गंगवार के राजनीतिक अनुभव और उनके परिवार के प्रभाव का लाभ श्रुति गंगवार को मिलेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार का बरेली से गहरा नाता रहा है और उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके समर्थकों की एक बड़ी संख्या आज भी बरेली में सक्रिय है। बेटी के राज्यसभा उम्मीदवार बनने से यह कयास लगाए जा रहे हैं कि गंगवार परिवार की राजनीतिक विरासत को एक नई दिशा और मजबूती मिल सकती है। यह कदम न केवल श्रुति गंगवार के राजनीतिक करियर के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, बल्कि यह बरेली में गंगवार परिवार के राजनीतिक प्रभाव को भी बनाए रखने या बढ़ाने में सहायक हो सकता है। इस पूरे घटनाक्रम ने बरेली की राजनीति में एक नई ऊर्जा का संचार किया है। कई नामों की चर्चाओं के बीच अचानक श्रुति गंगवार का नाम सामने आना निश्चित रूप से एक राजनीतिक सरप्राइज था। कुछ चेहरे जहां इस फैसले से उत्साहित दिखे, वहीं कुछ समर्थकों के लिए यह एक पहेली बनकर रह गया कि टिकट के समीकरण कैसे बदले। अब सवाल सिर्फ राज्यसभा टिकट प्राप्त करने का नहीं है, बल्कि यह भी है कि क्या श्रुति गंगवार के माध्यम से संतोष गंगवार परिवार की राजनीतिक विरासत को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। यह देखना बाकी है कि वह इस नई जिम्मेदारी को कितनी प्रभावी ढंग से निभा पाती हैं और बरेली की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बना पाती हैं या नहीं। फिलहाल, बरेली में हर तरफ इसी एक चर्चा का माहौल है कि नाम ऐसा आया कि पूरी सियासी गणित ही बदल गई।