रामपुर: मिलक तहसील में वकीलों का हल्लाबोल, भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायिक कार्य ठप मिलक, रामपुर | 23 मार्च 2026 - रामपुर जनपद की तहसील मिलक में व्याप्त भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और अधिवक्ताओं व वादकारियों के उत्पीड़न के खिलाफ बार एसोसिएशन मिलक ने सोमवार को एक बड़ा कदम उठाया है। बार सभागार में आयोजित एक आम सभा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि समस्त अधिवक्तागण 23 मार्च 2026 को न्यायिक कार्य से विरत रहेंगे। यह विरोध प्रदर्शन तहसील में लंबे समय से पनप रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। तहसील मिलक में व्याप्त भ्रष्टाचार: अधिवक्ताओं के गंभीर आरोप बार एसोसिएशन मिलक द्वारा आयोजित आम सभा में अधिवक्ताओं ने तहसील परिसर में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्था पर गहरी चिंता व्यक्त की। सभा में कई गंभीर आरोप लगाए गए, जो स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े करते हैं। अधिवक्ताओं का कहना है कि कृषि भूमि के विक्रय वादों के ऑनलाइन प्रिंट निकलने के बावजूद उन्हें दर्ज नहीं किया जा रहा है। यह एक ऐसी समस्या है जो सीधे तौर पर किसानों और भूमि मालिकों को प्रभावित करती है, जिससे उनके संपत्ति संबंधी अधिकारों में देरी हो रही है। इसके अतिरिक्त, दाखिल-खारिज के आदेशों का समय से अपलोड न होना भी एक बड़ी परेशानी का सबब बना हुआ है। यह प्रक्रिया भूमि स्वामित्व के हस्तांतरण और संबंधित सरकारी अभिलेखों के अद्यतन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2022 से पूर्व के मामलों में पुनर्स्थापन प्रार्थना पत्रों पर भी आयुक्त मुरादाबाद मंडल के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है, जिसे लेकर अधिवक्ताओं ने प्रभारी तहसीलदार पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया है। यह दर्शाता है कि प्रशासनिक आदेशों का भी तहसील स्तर पर कोई महत्व नहीं रह गया है। कंप्यूटर अनुभाग में अवैध वसूली का खेल: कंप्यूटर प्रभारी पर गंभीर आरोप तहसील मिलक के कंप्यूटर अनुभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर कंप्यूटर प्रभारी अरुण कुमार पर अधिवक्ताओं ने अत्यंत गंभीर आरोप लगाए हैं। सभा में यह बात सामने आई कि कंप्यूटर प्रभारी अक्सर कार्यालय बंद कर अन्य कार्यों में व्यस्त रहते हैं और रात में लोगों को बुलाकर अवैध वसूली करते हैं। यह आरोप चौंकाने वाले हैं और बताते हैं कि कैसे सरकारी तंत्र का दुरुपयोग व्यक्तिगत लाभ के लिए किया जा रहा है। अधिवक्ताओं ने यह भी शिकायत की कि कंप्यूटर से संबंधित कार्य प्राइवेट लोगों से कराए जा रहे हैं, जो न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि गुणवत्ता पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है। इतना ही नहीं, जानबूझकर त्रुटियां की जाती हैं और बाद में उन्हें सुधारने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है। यह एक सुनियोजित भ्रष्टाचार का खेल प्रतीत होता है, जिसमें आम आदमी की गाढ़ी कमाई को लूटा जा रहा है। तहसील मिलक में कंप्यूटर प्रभारी पर अवैध वसूली के गंभीर आरोप मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। उपजिलाधिकारी न्यायालय में भी भ्रष्टाचार: कोर्ट मोहर्रिर पर शिकंजा कसने की मांग समस्याएं केवल कंप्यूटर अनुभाग तक ही सीमित नहीं हैं। उपजिलाधिकारी न्यायालय में भी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी बताई गई हैं। कोर्ट मोहर्रिर रोहित कुमार पर जमानत के मामलों में अवैध वसूली करने का आरोप लगाया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि जेल भेजने का डर दिखाकर पैसे लिए जाते हैं। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि एक प्राइवेट महिला के माध्यम से लेन-देन कराने का भी आरोप है, जो इस पूरे रैकेट को और भी जटिल और संदेहास्पद बनाता है। तहसील के विभिन्न पटल पर निजी कर्मचारियों द्वारा अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ अभद्र व्यवहार किए जाने और बिना सुविधा शुल्क के कोई कार्य न होने की बात भी सामने आई। यह स्थिति आम वादकारियों के लिए अत्यंत निराशाजनक है, जिन्हें न्याय पाने के लिए उत्पीड़न और अवैध वसूली का सामना करना पड़ रहा है। रियल टाइम खतौनी में फीडिंग और परिवर्तन कार्यों में भी अवैध वसूली के आरोप लगाए गए हैं, जो कृषि भूमि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रभावित करते हैं। आयुक्त को सौंपा ज्ञापन, आंदोलन की चेतावनी इन सभी गंभीर समस्याओं को देखते हुए, अधिवक्ताओं ने संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उपजिलाधिकारी मिलक के माध्यम से आयुक्त, मुरादाबाद मंडल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है और चेतावनी दी गई है कि यदि शीघ्र ही इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। अधिवक्ताओं का कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई न होने से भ्रष्टाचार चरम सीमा पर पहुंच गया है और वादकारियों को समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है। आम सभा में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि 23 मार्च 2026 को समस्त अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से पूर्णतः विरत रहेंगे। यह एक प्रतीकात्मक विरोध है, जिसका उद्देश्य प्रशासन पर दबाव बनाना है ताकि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम उठाए। अधिवक्ताओं ने सभी न्यायालयों से इस आंदोलन में सहयोग की अपील की है, ताकि एक सामूहिक आवाज बुलंद की जा सके। बार एसोसिएशन की आम सभा: नेतृत्व और भविष्य की रणनीति इस महत्वपूर्ण आम सभा की अध्यक्षता श्री सतीश चंद्र गंगवार ने की, जिन्होंने अधिवक्ताओं के संघर्ष को मजबूती से प्रस्तुत किया। सभा का संचालन महासचिव श्री रमेश चंद्र गंगवार द्वारा किया गया, जिन्होंने सभी सदस्यों को एकजुट रहने और अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित किया। सभा में बार एसोसिएशन के सभी सदस्य उपस्थित रहे, जो इस बात का प्रमाण है कि यह मुद्दा सभी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। मिलक तहसील में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ वकीलों का विरोध केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह न्याय व्यवस्था में आम आदमी के विश्वास को बनाए रखने के लिए एक आवश्यक कदम है। उम्मीद है कि आयुक्त मुरादाबाद मंडल इस ज्ञापन का संज्ञान लेंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे, ताकि तहसील मिलक में न्याय का मार्ग प्रशस्त हो सके और वादकारियों को राहत मिल सके।