रामपुर न्यूज़
रामपुर Rampur News Desk • 2026-09-29T08:30:05.98+00:00

मिलक में गाटा संख्या रहित रजिस्ट्री पर रोक के खिलाफ अधिवक्ताओं का विरो

तहसील मिलक, जिला रामपुर में बार एसोसिएशन मिलक के अधिवक्ताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन उप जिलाधिकारी महोदय मिलक की अनुपस्थिति में तहसीलदार मिलक को सौंपा है। यह ज्ञापन महानिरीक्षक निबंधन उत्तर प्रदेश लखनऊ द्वारा जारी की गई अधिसूचना संख्या 23.9.2026 के संदर्भ में दिया गया है, जिसमें सभी उप निबंधक कार्यालयों को गाटा संख्या रहित रजिस्ट्री न करने का निर्देश दिया गया है। अधिवक्ताओं का कहना है कि इस आदेश के कारण ग्रामीण, अर्ध-शहरी और शहरी क्षेत्रों में चल रहे गृह निर्माण और अन्य अचल संपत्ति से जुड़े कार्य प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि कई मामलों में खतौनी में गाटा संख्या ज्ञात करना असंभव है। यह महत्वपूर्ण बैठक 29 सितंबर 2026 को बार एसोसिएशन मिलक के सभागार में आयोजित की गई थी। इस बैठक में अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि जब तक सभी घरौनी (आवासीय पट्टों) का कार्य पूर्ण नहीं हो जाता, तब तक पूर्व की भांति गाटा संख्या रहित रजिस्ट्री का कार्य सुचारू रूप से जारी रखा जाए। अधिवक्ताओं का तर्क है कि वर्तमान स्थिति में गाटा संख्या के बिना रजिस्ट्री न होने से आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और उनके निर्माण कार्य रुक सकते हैं। गाटा संख्या रहित रजिस्ट्री पर रोक का मामला महानिरीक्षक निबंधन उत्तर प्रदेश, लखनऊ द्वारा जारी की गई अधिसूचना 23 सितंबर 2026 के अनुसार, सभी उप निबंधक कार्यालयों को यह निर्देश दिया गया है कि वे बिना गाटा संख्या के किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री न करें। इस आदेश का उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया में पारदर्शिता और सटीकता लाना है, ताकि भविष्य में भूमि संबंधी विवादों को कम किया जा सके। हालांकि, इस आदेश के लागू होने से उन क्षेत्रों में समस्या उत्पन्न हो गई है जहाँ भूमि का वर्गीकरण और गाटा संख्या का निर्धारण अभी तक पूरी तरह से नहीं हुआ है। तहसील मिलक के अधिवक्ता इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में कई ऐसे घर, मकान, दुकान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं जिनकी रजिस्ट्री के लिए आवश्यक गाटा संख्या उपलब्ध नहीं है। यह स्थिति विशेष रूप से उन लोगों के लिए चिंताजनक है जिन्होंने हाल ही में संपत्ति खरीदी है या निर्माण कार्य शुरू किया है। गाटा संख्या के अभाव में, इन संपत्तियों की रजिस्ट्री अटक जाएगी, जिससे न केवल संपत्ति मालिकों को नुकसान होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। अधिवक्ताओं की मांग और ज्ञापन का उद्देश्य मिलक बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश चंद्र गंगवार और महासचिव रमेश चंद्र गंगवार के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के एक बड़े समूह ने तहसीलदार मिलक को यह ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक सभी खतौनी और घरौनी का कार्य पूर्ण नहीं हो जाता और सभी संपत्तियों की गाटा संख्या स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं हो जाती, तब तक गाटा संख्या रहित रजिस्ट्री की प्रक्रिया को जारी रखने की अनुमति दी जाए। अधिवक्ताओं का मानना है कि यह एक अस्थायी समाधान है जो आम जनता को तत्काल राहत प्रदान करेगा और निर्माण कार्यों को जारी रखने में मदद करेगा। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस समस्या का समाधान खोजने के लिए सरकार को एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। अधिवक्ताओं ने सुझाव दिया है कि एक निश्चित अवधि के भीतर गाटा संख्या निर्धारण का कार्य पूरा किया जाए और इस दौरान पुरानी प्रक्रिया को जारी रखा जाए। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि इस आदेश के कारण आम आदमी को अनावश्यक परेशानी और आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, जो कि न्यायसंगत नहीं है। जनता पर प्रभाव और भविष्य की राह गाटा संख्या रहित रजिस्ट्री पर लगी रोक का सीधा असर उन आम नागरिकों पर पड़ रहा है जो अपनी मेहनत की कमाई से घर या दुकान बना रहे हैं। बिना रजिस्ट्री के, उनकी संपत्ति कानूनी रूप से पूरी तरह से उनकी नहीं मानी जाएगी, जिससे उन्हें भविष्य में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, यह स्थिति रियल एस्टेट बाजार को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि खरीदार और विक्रेता दोनों ही अनिश्चितता के माहौल में निर्णय लेने से हिचकिचाएंगे। मिलक बार एसोसिएशन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल जाता, तब तक लोगों को राहत देने के लिए यह आवश्यक है कि रजिस्ट्री का कार्य पूर्ववत जारी रहे। अधिवक्ताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि वे किसी भी तरह की अनियमितता को बढ़ावा नहीं देना चाहते, बल्कि उनका उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना न करना पड़े और विकास कार्य बाधित न हों। इस ज्ञापन के माध्यम से, मिलक के अधिवक्ताओं ने अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने का प्रयास किया है। उम्मीद है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले की गंभीरता को समझेगी और अधिवक्ताओं की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। गाटा संख्या निर्धारण का कार्य एक जटिल प्रक्रिया है और इसमें समय लग सकता है, इसलिए इस दौरान लोगों को राहत देना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बार एसोसिएशन ने यह भी कहा है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो वे आंदोलन करने पर भी विचार कर सकते हैं।