मिलक तहसील में आयोजित संपूर्ण समाधान दिवस के दौरान एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक सरकारी अधिकारी को बैठक के दौरान सोफे पर आराम करते हुए देखा जा सकता है। यह संपूर्ण समाधान दिवस मुख्य रूप से जन शिकायतों के निवारण के उद्देश्य से आयोजित किया गया था, लेकिन इसमें एक अधिकारी की लापरवाही ने पूरे कार्यक्रम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना ने सरकारी तंत्र में जवाबदेही और कार्य संस्कृति पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाए हैं। यह संपूर्ण समाधान दिवस मूल रूप से जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित होने वाला था। जिलाधिकारी के किसी अपरिहार्य कारणवश अनुपस्थित रहने के चलते, इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) रामपुर द्वारा की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक (एसपी) महोदय सहित जिले के कई अन्य आला अधिकारी भी मौजूद थे। संपूर्ण समाधान दिवस का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं और शिकायतों को सुनना और उनका त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करना होता है। ऐसे आयोजनों में अधिकारियों की उपस्थिति और सक्रियता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है ताकि फरियादी अपनी व्यथा खुलकर कह सकें और उन्हें न्याय मिल सके। संपूर्ण समाधान दिवस का महत्व और उद्देश्य संपूर्ण समाधान दिवस उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों से संबंधित जन शिकायतों का एक ही छत के नीचे समाधान करना है। यह दिवस प्रत्येक माह के तीसरे मंगलवार को आयोजित किया जाता है, जिसमें जिलाधिकारी या उनके प्रतिनिधि की अध्यक्षता में संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहते हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए विभिन्न कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। इस प्रकार के आयोजनों से न केवल आम जनता को राहत मिलती है, बल्कि सरकारी मशीनरी में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ती है। मिलक तहसील में आयोजित इस समाधान दिवस में भी यही उम्मीद थी कि फरियादियों की समस्याओं को गंभीरता से सुना जाएगा और उनका संतोषजनक समाधान किया जाएगा। बैठक में सीडीओ और एसपी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति इस बात का संकेत दे रही थी कि यह एक महत्वपूर्ण बैठक है। हालांकि, एक अधिकारी का इस तरह से बैठक के दौरान सोफे पर आराम फरमाना, न केवल उनकी व्यक्तिगत लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह पूरे प्रशासनिक अमले के प्रति जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि कुछ अधिकारी अभी भी सरकारी समय का दुरुपयोग करने से बाज नहीं आ रहे हैं। अधिकारी की लापरवाही का वायरल वीडियो वायरल हो रहे वीडियो में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि एक अधिकारी कुर्सी पर बैठने के बजाय सोफे पर लेटे हुए हैं और संभवतः सो रहे हैं। उनके बगल में अन्य अधिकारी भी बैठे हुए दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उनका ध्यान उस अधिकारी पर नहीं है जो आराम फरमा रहा है। यह वीडियो किसने और कब बनाया, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन इसके सार्वजनिक होने के बाद से ही यह चर्चा का विषय बन गया है। वीडियो में दिख रहे अधिकारी की पहचान की कोशिश की जा रही है, और उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले में उचित कार्रवाई करेगा। इस तरह की लापरवाही से जनता के मन में यह सवाल उठता है कि जब अधिकारी ही जन समस्याओं के समाधान के प्रति गंभीर नहीं होंगे, तो आम आदमी अपनी फरियाद लेकर कहां जाएगा। संपूर्ण समाधान दिवस जैसे आयोजनों का उद्देश्य ही यही है कि अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर जनता की समस्याओं को समझें और उनका निवारण करें। लेकिन जब अधिकारी ही बैठक में सोएंगे, तो इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है। यह घटना सरकारी कर्मचारियों के आचरण और अनुशासन पर भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है। प्रशासनिक अमले पर सवालिया निशान सीडीओ रामपुर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में एसपी और अन्य आला अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद एक अधिकारी का इस तरह से सोफे पर आराम करना, यह दर्शाता है कि कहीं न कहीं प्रशासनिक निरीक्षण और नियंत्रण में भी कमी है। यह संभव है कि यह अधिकारी अपनी ड्यूटी के दौरान थका हुआ हो, लेकिन संपूर्ण समाधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर इस तरह का व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। इस घटना ने मिलक तहसील के प्रशासनिक अमले की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यह वीडियो वायरल होने के बाद, उम्मीद की जा रही है कि संबंधित विभाग इस मामले की जांच करेगा और दोषी अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगा। ऐसी कार्रवाई न केवल उस अधिकारी के लिए एक सबक होगी, बल्कि अन्य अधिकारियों को भी भविष्य में इस तरह की लापरवाही से बचने के लिए प्रेरित करेगी। सरकारी तंत्र में जवाबदेही सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है, खासकर तब जब जनता का विश्वास बनाए रखना हो। इस घटना को गंभीरता से लिया जाना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न हो और संपूर्ण समाधान दिवस जैसे महत्वपूर्ण आयोजन अपने मूल उद्देश्य को प्राप्त कर सकें।