रामपुर जिले की मिलक तहसील में ऑनलाइन फ्रेंचाइजी मॉडल एवं ई-रजिस्ट्री व्यवस्था के खिलाफ अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल आज, 30 जून को भी जारी रही। यह आंदोलन 23 जून 2026 से चल रहा है और अब इसने और भी तेज रूप धारण कर लिया है। हड़ताल के कारण तहसील के न्यायालयों का संपूर्ण न्यायिक कार्य ठप पड़ा हुआ है, जिससे आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार उनकी मांगों को नहीं मानती और इस व्यवस्था को पूरी तरह वापस नहीं लेती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। यह हड़ताल हजारों लोगों की आजीविका से जुड़ी हुई है। क्यों हो रहा है विरोध? बार एसोसिएशन, बैनामा लेखक संघ, स्टांप वेंडर संघ एवं मुंशियों ने मिलकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाया है। अध्यक्ष सतीश चंद्र गंगवार एडवोकेट की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में यह निर्णय लिया गया कि ऑनलाइन फ्रेंचाइजी मॉडल और ई-रजिस्ट्री व्यवस्था को पूरी तरह से वापस लिए जाने तक यह कलमबंद हड़ताल जारी रहेगी। आंदोलनकारियों का कहना है कि यह व्यवस्था उनके लिए एक "काला कानून" है, जो उनकी रोजी-रोटी छीनने का काम करेगी। उन्होंने सरकार द्वारा की गई घोषणाओं को केवल "लॉलीपॉप" करार दिया और कहा कि जब तक यह कानून पूर्ण रूप से रद्द नहीं होता, तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे। बैठक के उपरांत, सभी अधिवक्ता, बैनामा लेखक, स्टांप वेंडर और मुंशी एक साथ उप निबंधक (सब रजिस्ट्रार) कार्यालय मिलक तक एक विशाल जुलूस के रूप में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के चेहरों पर सरकार के प्रति रोष स्पष्ट दिखाई दे रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और भी उग्र रूप दिया जाएगा। आंदोलन का प्रभाव और भविष्य की रणनीति बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश चंद्र गंगवार एडवोकेट और महासचिव रमेश चंद गंगवार एडवोकेट ने संयुक्त रूप से कहा कि इस नई ऑनलाइन व्यवस्था से न केवल अधिवक्ताओं, बैनामा लेखकों, मुंशियों और स्टांप वेंडरों की आजीविका पर संकट आएगा, बल्कि इससे बेरोजगारी भी बढ़ेगी। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह व्यवस्था हजारों परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी और उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से कमजोर कर देगी। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह जमीनी हकीकत को समझे और इस अव्यवहारिक व्यवस्था को वापस ले। इस हड़ताल के कारण मिलक तहसील में चल रहे सभी न्यायिक कार्य पूरी तरह से बाधित हो गए हैं। रजिस्ट्री से संबंधित सभी कार्य रुके हुए हैं, जिससे संपत्ति के लेनदेन में भी रुकावट आ गई है। आम जनता को अपनी जमीन-जायदाद से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा कराने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आंदोलनकारियों ने कहा कि वे जनता की परेशानी को समझते हैं, लेकिन अपनी आजीविका की लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें यह कदम उठाना पड़ा है। आंदोलनकारियों के बीच एक नारा गूंज रहा था, जिसने उनके संकल्प को और भी मजबूत किया: "अभी तो ली है अंगड़ाई, आगे और लड़ाई है!" यह नारा दर्शाता है कि वे इस लड़ाई को अंतिम दम तक लड़ने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और यदि सरकार ने उनकी मांगों को अनसुना किया तो वे देशव्यापी आंदोलन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। रामपुर जिले के अन्य तहसीलों से भी समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। यह स्थिति मिलक तहसील में एक बड़े सामाजिक और आर्थिक मुद्दे को उजागर करती है। ऑनलाइन व्यवस्थाओं को लागू करने के पीछे सरकार का उद्देश्य भले ही पारदर्शिता और सुगमता लाना हो, लेकिन यदि इससे आम आदमी और छोटे व्यवसायों की आजीविका प्रभावित होती है, तो ऐसे सुधारों पर पुनर्विचार आवश्यक हो जाता है। रामपुर न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आगे की जानकारी आप तक पहुंचाता रहेगा।