उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है। राजरतन अंबेडकर ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर नई राजनीतिक अटकलों को जन्म दे दिया है। इस मुलाकात के बाद प्रदेश की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई है। मुलाकात के दौरान राजरतन अंबेडकर ने एक तीखा नारा भी दिया— "मिले अंबेडकर और अखिलेश, खुल जाएंगे साधुओं के भेष" इस बयान को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर विरोधी विचारधारा और खासकर धार्मिक-राजनीतिक छवि पर निशाना माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुलाकात दलित वोट बैंक और पिछड़े वर्गों के बीच संभावित गठजोड़ की ओर संकेत हो सकती है। अगर ऐसा कोई समीकरण बनता है, तो इसका असर आने वाले चुनावों में देखने को मिल सकता है। हालांकि, अभी तक इस मुलाकात को लेकर कोई औपचारिक गठबंधन घोषित नहीं हुआ है, लेकिन इस एक बैठक ने ही सियासी पारा बढ़ा दिया है। विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ही इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।