लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की जेल से रिहाई के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई गिरफ्तारी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण और कायराना हरकत बताया है। अखिलेश यादव ने कहा कि जिस तरह से एक उम्रदराज नेता को बार-बार बेमानी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है, वह पूरे देश और दुनिया की नजरों में है। उन्होंने चेतावनी दी कि आज की सत्ता जिस गलत रवायत को बढ़ावा दे रही है, वह खुद भी हवा बदलने पर इसका शिकार होगी। आजम खान की गिरफ्तारी पर अखिलेश यादव का तीखा प्रहार अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आजम खान की गिरफ्तारी का वीडियो साझा करते हुए एक तीखा संदेश लिखा। उन्होंने कहा, "आज के हुक्मरानों को याद रहे, जब वक्त बदल जाता है तो तख्त बदल जाता है।" यह बयान सीधे तौर पर सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए भविष्य में सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा था। उन्होंने आगे कहा कि आदरणीय आजम खान साहब के साथ मुकदमों की जो साजिश रची जा रही है, उसे पूरा देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया देख रही है। किसी उम्रदराज व्यक्ति को इस तरह के बेमानी मुकदमों में फंसाकर बार-बार जेल में डालना एक बेहद कायराना हरकत है। समाजवादी पार्टी के मुखिया ने इस बात पर जोर दिया कि आज की सत्ता जिस गलत रवायत को हवा दे रही है, वह हवा बदलने पर खुद उसकी शिकार होगी। उन्होंने कहा कि नाइंसाफी जब हद से गुजर जाती है, तो जुल्म करने वालों के लिए ही कहर बन जाती है। यह बयान आजम खान के प्रति पार्टी के समर्थन को दर्शाता है और ED की कार्रवाई को राजनीतिक द्वेष से प्रेरित बताता है। अखिलेश यादव ने इस घटनाक्रम को न्याय व्यवस्था के दुरुपयोग का उदाहरण बताते हुए सरकार पर निशाना साधा है। जौहर यूनिवर्सिटी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई गिरफ्तारी यह घटनाक्रम 31 अक्टूबर को तब हुआ जब आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रामपुर जेल से रिहा हुए थे। जेल के गेट से बाहर निकलते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह गिरफ्तारी जेल से रिहाई के कुछ ही घंटों के भीतर हुई, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। वहीं, अब्दुल्ला आजम अपने घर चले गए, जबकि आजम खान को ED अपने साथ ले गई। ED की यह कार्रवाई जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और संचालन में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है। आजम खान पर आरोप है कि उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर विश्वविद्यालय के लिए अवैध रूप से जमीन हासिल की और धन का दुरुपयोग किया। यह मामला कई वर्षों से जांच के दायरे में है और ED ने पहले भी इस संबंध में आजम खान से पूछताछ की है। इस बार की गिरफ्तारी ने मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भविष्य की रणनीति अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया इस गिरफ्तारी के खिलाफ समाजवादी पार्टी के रुख को स्पष्ट करती है। पार्टी ने इसे आजम खान को राजनीतिक रूप से कमजोर करने का प्रयास बताया है। यह घटनाक्रम उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गरमा गर्मी का माहौल पैदा कर सकता है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने और सरकार के खिलाफ आवाज उठाने की रणनीति पर काम कर सकती है। यह गिरफ्तारी ऐसे समय में हुई है जब आजम खान पहले से ही कई अन्य मामलों में कानूनी पचड़ों का सामना कर रहे हैं। उनकी रिहाई के तुरंत बाद हुई यह कार्रवाई उनके समर्थकों के लिए निराशाजनक है और राजनीतिक विरोधियों के लिए एक बड़ा मुद्दा। ED की यह कार्रवाई भविष्य में अन्य नेताओं के खिलाफ भी इसी तरह की कार्रवाई की संभावनाओं को बढ़ा सकती है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो सकता है। समाजवादी पार्टी का मानना है कि यह सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। अखिलेश यादव के बयान से यह साफ है कि पार्टी इस गिरफ्तारी का कड़ा विरोध करेगी और इसे न्याय की लड़ाई के रूप में देखेगी। भविष्य में इस मामले को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई तेज होने की उम्मीद है।