23 नवंबर 2025 को बिजनौर के नांगल सोती थाना क्षेत्र से एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वीडियो कॉल के दौरान कुछ युवक AK-47 जैसे हथियार और हैंड ग्रेनेड दिखाते नजर आए थे। शुरुआत में इस मामले को हल्के में लिया गया, लेकिन अब जांच में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। तत्कालीन थाना प्रभारी ने इसे खिलौना और परफ्यूम की बोतल बताकर मामले को दबाने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में कार्रवाई करते हुए उन्हें सस्पेंड कर दिया गया, जबकि संबंधित क्षेत्राधिकारी का तबादला कर दिया गया। जांच में क्या खुलासा हुआ? अमिताभ यश (एडीजी कानून-व्यवस्था) ने बताया कि यह गिरोह पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के संपर्क में था और देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। गिरोह का मुख्य आरोपी साकिब उर्फ डेविल (निवासी मेरठ) है, जिसे सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तानी नेटवर्क से जोड़ा गया था। उसका संपर्क आकिब नाम के युवक से हुआ, जो वर्तमान में दुबई में रह रहा है और इसी के जरिए अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन बना। QR कोड से आती थी फंडिंग: जांच में सामने आया कि यह गिरोह पाकिस्तानी हैंडलर्स से QR कोड के जरिए पैसे मंगाता था। बदले में ये लोग आगजनी, तोड़फोड़ और संवेदनशील जगहों की रेकी कर उनके वीडियो भेजते थे। गिरोह के निशाने पर रेलवे सिग्नल बॉक्स, गैस सिलेंडर से भरे ट्रक और राजनीतिक व्यक्ति थे। उन्होंने गाजियाबाद, अलीगढ़ और लखनऊ जैसे शहरों में कई अहम स्थानों की रेकी भी की थी। बड़ी साजिश नाकाम: ATS के अनुसार, 2 अप्रैल को लखनऊ में रेलवे संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और विस्फोट की बड़ी योजना बनाई गई थी। लेकिन समय रहते कार्रवाई करते हुए ATS ने मुख्य आरोपी समेत कई संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 7 स्मार्टफोन बरामद हुए हैं, जिनमें कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं। 5 अप्रैल को सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 5 दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया।