रामपुर न्यूज़
उत्तर प्रदेश Rampur News Desk • 2026-08-12T12:07:49.878+00:00

लखनऊ: सेक्स रैकेट में उज्बेकिस्तानी महिला गिरफ्तार

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में मंगलवार देर रात पुलिस ने एक बड़े देह व्यापार के कथित इंटरनेशनल सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए उज्बेकिस्तानी महिला लोला कायूमोवा को गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि लोला करीब एक साल से पुलिस की पकड़ से फरार चल रही थी। सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की एक संयुक्त टीम ने मैक्स अस्पताल के पास से उसे दबोच लिया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि लोला ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कथित तौर पर प्लास्टिक सर्जरी के जरिए अपना हुलिया बदलवाया था। इसके साथ ही उस पर फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट के आधार पर भारतीय दस्तावेज तैयार कराने का भी गंभीर आरोप है। इस गिरफ्तारी से लखनऊ में चल रहे एक बड़े सेक्स रैकेट के नेटवर्क के तार जुड़ने की आशंका जताई जा रही है। अंतर्राष्ट्रीय सेक्स रैकेट का खुलासा पुलिस के अनुसार, यह मामला पहली बार जून 2025 में तब सामने आया था जब सुशांत गोल्फ सिटी पुलिस ने ओमेक्स अपार्टमेंट स्थित एक फ्लैट पर छापा मारा था। उस दौरान पुलिस ने दो उज्बेकिस्तानी महिलाओं को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान ही पुलिस को लोला कायूमोवा के बारे में अहम जानकारी मिली थी। आरोप है कि लोला विदेशी युवतियों को लखनऊ लाकर उन्हें अवैध रूप से ठहराती थी और एक बड़े सेक्स रैकेट का संचालन करती थी। इस रैकेट के माध्यम से वह न केवल अवैध कमाई करती थी, बल्कि विदेशी युवतियों के शोषण का भी एक बड़ा मामला सामने आया था। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। जांच के दौरान पुलिस को इस बात की भी जानकारी मिली कि लोला कायूमोवा ने अपनी पहचान छिपाने और पुलिस की पकड़ से बचने के लिए कई तरह के हथकंडे अपनाए थे। उसने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। पुलिस का दावा है कि लोला ने पुलिस और स्थानीय खुफिया इकाई (एलआईयू) को गुमराह करने के लिए एक फर्जी मैरिज सर्टिफिकेट का सहारा लिया था। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर उसने अपना आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे महत्वपूर्ण भारतीय पहचान पत्र भी बनवा लिए थे। यह कृत्य भारतीय कानूनों के तहत एक गंभीर अपराध है और इससे राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। पहचान छिपाने के लिए सात बार कराई प्लास्टिक सर्जरी जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पुलिस से अपनी पहचान पूरी तरह छिपाने के लिए लोला कायूमोवा ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया था। उसने कथित तौर पर सात बार प्लास्टिक सर्जरी करवाई थी और अपना चेहरा पूरी तरह बदलवा लिया था। यह जानकारी इस मामले की गंभीरता को और बढ़ाती है, क्योंकि यह दर्शाता है कि वह कितनी गहराई से इस रैकेट में शामिल थी और पकड़े जाने से बचने के लिए कितने बड़े कदम उठाने को तैयार थी। प्लास्टिक सर्जरी के माध्यम से अपना हुलिया बदलना एक बहुत ही महंगा और जटिल प्रक्रिया है, और इसका उपयोग अक्सर उन लोगों द्वारा किया जाता है जो किसी बड़े अपराध में लिप्त होते हैं और अपनी पहचान छिपाना चाहते हैं। वर्तमान में, लोला कायूमोवा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस उससे जुड़े पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं, किन-किन लोगों ने उसे फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद की, और उसके तार किन-किन देशों से जुड़े हुए हैं। फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की भी विस्तृत जांच की जा रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों को भी पकड़ा जा सके। यह जांच न केवल लखनऊ पुलिस के लिए, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। आगे की जांच और संभावित परिणाम पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से अंतरराष्ट्रीय सेक्स रैकेट के संचालन में लिप्त कई अन्य लोगों के चेहरों से भी नकाब उठ सकता है। लोला कायूमोवा से पूछताछ के आधार पर पुलिस अन्य गिरफ्तारियों की भी उम्मीद कर रही है। इस पूरे मामले में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल और पहचान छिपाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी जैसे तरीके अपनाना, इस गिरोह की कार्यप्रणाली को दर्शाता है। पुलिस अब लोला के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की भी जांच करेगी ताकि उसके अवैध कमाई के स्रोतों का पता लगाया जा सके। यह मामला लखनऊ में अंतरराष्ट्रीय अपराधों के बढ़ते ग्राफ पर भी प्रकाश डालता है। यह खबर उपलब्ध जानकारी और पुलिस से जुड़े दावों के आधार पर तैयार की गई है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। हालांकि, प्रारंभिक जांच और गिरफ्तारी से यह स्पष्ट है कि मामला गंभीर है और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय तार जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इस मामले को अत्यंत संवेदनशीलता से ले रही है और जल्द से जल्द पूरे गिरोह का पर्दाफाश करने का प्रयास कर रही है। इस तरह के रैकेट न केवल सामाजिक बुराई हैं, बल्कि देश की छवि को भी धूमिल करते हैं।