संपादकीय

"रिश्वत: अन्याय से ‘अन्य आय’ तक का सफर"

लेख: समाज में न्याय और ईमानदारी को हमेशा सबसे बड़ी ताकत माना गया है। हर धर्म, हर संस्कृति और हर कानून यही सिखाता है कि गलत के खिलाफ खड़ा होना ही सच्ची इंसानियत है। रिश्वत लेना हमेशा से एक बड़ा अन्याय माना गया है, क्योंकि यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि नैतिक मूल्यों को भी कमजोर करता है।

Mohd Zeeshan Raza Khan··2 मिनट पढ़ने का समय
"रिश्वत: अन्याय से ‘अन्य आय’ तक का सफर"
समाज में न्याय और ईमानदारी को हमेशा सबसे बड़ी ताकत माना गया है। हर धर्म, हर संस्कृति और हर कानून यही सिखाता है कि गलत के खिलाफ खड़ा होना ही सच्ची इंसानियत है। रिश्वत लेना हमेशा से एक बड़ा अन्याय माना गया है, क्योंकि यह न केवल कानून का उल्लंघन है बल्कि नैतिक मूल्यों को भी कमजोर करता है। लेकिन समय के साथ इंसान की सोच में एक खतरनाक बदलाव देखने को मिला है। “अन्याय” जैसे गंभीर शब्द को कुछ लोगों ने “अन्य आय” यानी अतिरिक्त कमाई के रूप में समझना शुरू कर दिया है। यही सोच भ्रष्टाचार की जड़ बन गई है। रिश्वत अब कुछ लोगों के लिए गलत काम नहीं, बल्कि एक आसान कमाई का जरिया बन चुकी है। जब कोई व्यक्ति रिश्वत लेता है, तो वह सिर्फ एक नियम नहीं तोड़ता, बल्कि पूरे समाज के विश्वास को तोड़ता है। इससे गरीब और जरूरतमंद व्यक्ति सबसे ज्यादा प्रभावित होता है, क्योंकि उसे अपने अधिकार पाने के लिए भी पैसे देने पड़ते हैं। वहीं, ईमानदार लोग पीछे रह जाते हैं और गलत तरीके अपनाने वाले आगे बढ़ जाते हैं। यह स्थिति केवल कानून से नहीं, बल्कि सोच से बदल सकती है। जब तक इंसान “अन्याय” को “अन्य आय” समझता रहेगा, तब तक समाज में सच्चा न्याय स्थापित नहीं हो पाएगा। हमें अपनी सोच को बदलना होगा और यह समझना होगा कि गलत तरीके से कमाया गया धन कभी सुख और शांति नहीं दे सकता। अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि रिश्वत केवल एक अपराध नहीं, बल्कि समाज की आत्मा पर एक चोट है। अगर हमें एक बेहतर और न्यायपूर्ण समाज बनाना है, तो हमें इस बुराई के खिलाफ खड़ा होना होगा और ईमानदारी को अपनी असली पहचान बनाना होगा।
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