पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर है। करीब 15 साल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनावी मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर है। करीब 15 साल से सत्ता में काबिज ममता बनर्जी और उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस को कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है, जबकि भारतीय जनता पार्टी मजबूत स्थिति में नजर आ रही है।
राज्य में सत्ता विरोधी लहर एक बड़ा फैक्टर माना जा रहा है। लंबे शासन के चलते विकास, भ्रष्टाचार और स्थानीय मुद्दों को लेकर असंतोष बढ़ा है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने भी चुनावी माहौल को प्रभावित किया है।
संदेशखाली और आरजी कर जैसे मामलों ने खासकर महिला और शहरी वोटरों के बीच चर्चा को तेज किया। भाजपा ने इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सुरक्षा और सुशासन को अपने अभियान का केंद्र बनाया।
साथ ही, संगठनात्मक मजबूती, बूथ स्तर की रणनीति और केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों तक पहुंच ने भी भाजपा की स्थिति को मजबूत किया है।
