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NEET परीक्षा पेपर लीक: अभिजीत दीपके के माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू, घर वापसी का इंतज़ार

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NEET परीक्षा पेपर लीक: अभिजीत दीपके के माता-पिता की आँखों में खुशी के आँसू, घर वापसी का इंतज़ार
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नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से अभिजीत दीपके के माता-पिता की आँखों में खुशी और राहत के आँसू थे।

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन के सफल समापन के बाद, पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके के माता-पिता, अनीता और भगवानराव दीपके, खुशी और राहत से अभिभूत थे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और सरकार द्वारा CJP की मांगों को स्वीकार किए जाने की खबर मिलते ही उनके आँसू बह निकले। यह घटना 25 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में हुई, जहाँ NEET परीक्षा के पेपर लीक के मुद्दे पर CJP ने अपना आंदोलन चलाया था।

पृष्ठभूमि: NEET परीक्षा और CJP का आंदोलन

राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) भारत में मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। हाल के वर्षों में, इस परीक्षा के पेपर लीक होने की घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों के बीच भारी आक्रोश पैदा किया है। इसी पृष्ठभूमि में, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर, नई दिल्ली में एक जोरदार विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। CJP की मुख्य मांग NEET परीक्षा के पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी। यह आंदोलन पिछले ढाई महीनों से चल रहा था और इसने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया था।

अभिजीत दीपके, जो CJP के संस्थापक हैं, इस आंदोलन के केंद्र में थे। उनके माता-पिता, अनीता और भगवानराव दीपके, जो छत्रपति संभाजीनगर में रहते हैं, अपने बेटे की सुरक्षा और आंदोलन की सफलता को लेकर चिंतित थे। अनीता दीपके ने बताया कि आंदोलन के दौरान वह ठीक से सो भी नहीं पाती थीं। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए खुशी और राहत के आँसू हैं, क्योंकि उनके बेटे की कड़ी मेहनत और ईमानदारी आखिरकार रंग लाई है।

आंदोलन का विवरण और परिवार का संघर्ष

अनीता दीपके ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि अभिजीत को आंदोलन के दौरान बहुत कुछ झेलना पड़ा। उन पर स्याही फेंकी गई, उन्हें थप्पड़ मारा गया और उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि वे पिछले ढाई महीनों से भारी तनाव में थे, लेकिन आज उन्हें राहत मिली है। उनके पति, भगवानराव दीपके, जो उनके बगल में खड़े थे, अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे और उन्होंने रुमाल से अपने आँसू पोंछे।

भगवानराव दीपके ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को एक उदार कदम बताया। उन्होंने कहा कि इसे किसी की जीत या हार के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह दर्शाता है कि मंत्री ने छात्रों के हितों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मंत्री इस्तीफा नहीं देते, तो आंदोलन किस दिशा में जाता, यह अनिश्चित था। छात्रों और उनके माता-पिता के दिलों में काफी गुस्सा था, जिसे मंत्री के इस्तीफे से शांत करने में मदद मिली।

भगवानराव दीपके ने उन कठिन समयों को याद किया जब उनके बेटे को अपमानित किया गया था। उन्होंने बताया कि अभिजीत को 'आतंकवादी' कहा गया, उसे पीटा गया और उस पर विदेशी फंडिंग का आरोप लगाया गया। अमेरिका से लौटने के बाद परिवार को जबरदस्त दबाव का सामना करना पड़ा था। उन्होंने कहा कि अगर अभिजीत आज उनके साथ होता, तो वे उसे गले लगा लेते। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि आप डरते नहीं हैं, तो आप जीत सकते हैं, जैसा कि अभिजीत ने साबित किया।

परिवार की चिंता और अभिजीत का दृढ़ संकल्प

परिवार ने आंदोलन की लाइव कवरेज देखना भी तनावपूर्ण पाया और उन्होंने टीवी देखना बंद कर दिया था। शनिवार को, जब आंदोलन समाप्त हुआ, तब उन्होंने फिर से टीवी चालू किया। भगवानराव दीपके को एक दोस्त से फोन पर खबर मिली, जिसके बाद उन्होंने यूट्यूब पर समाचार देखा। परिवार अपने इकलौते बेटे अभिजीत की सुरक्षा को लेकर बहुत डरा हुआ था। अनीता दीपके ने बताया कि अभिजीत ने पहले कभी इतनी कठिनाइयों का सामना नहीं किया था। वह अमेरिका में पढ़ रहा था, लेकिन इस आंदोलन के लिए उसने मच्छर के बीच सोने और अकेले रहने जैसी परिस्थितियों को स्वीकार किया।

अनीता ने बताया कि कई बार उन्होंने अभिजीत से वापस आने के लिए कहा था, लेकिन वह बहुत जिद्दी था। उसने कसम खाई थी कि जब तक मंत्री इस्तीफा नहीं देंगे, वह वापस नहीं लौटेगा। आज, 29 साल की उम्र में, उसने इतनी बड़ी जीत हासिल की है। परिवार के सदस्यों ने बताया कि अभिजीत वर्तमान में टाइफाइड का इलाज करा रहा है। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने दीपके निवास पर आकर परिवार को मिठाइयाँ दीं और पटाखे चलाकर खुशी मनाई।

आंदोलन का महत्व और भविष्य की दिशा

NEET परीक्षा पेपर लीक मामले में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन की सफलता ने छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले संगठनों को एक नई प्रेरणा दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस बात का संकेत है कि सरकार छात्रों की चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। यह घटना दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर संगठित विरोध प्रदर्शन और दृढ़ संकल्प से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। अभिजीत दीपके और CJP ने यह साबित कर दिया है कि युवा शक्ति और ईमानदारी के साथ किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

इस आंदोलन ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता की आवश्यकता पर फिर से जोर दिया है। भविष्य में, यह उम्मीद की जाती है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे और छात्रों को एक सुरक्षित और निष्पक्ष परीक्षा वातावरण प्रदान किया जाएगा। अभिजीत दीपके की घर वापसी का इंतजार अब खुशी में बदल गया है, और यह घटना रामपुर सहित पूरे देश के युवाओं के लिए एक मिसाल बनेगी।

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