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मिलक में आशा बहुओं का सम्मान न मिलने से आक्रोश, ₹20 हजार मासिक मानदेय की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन

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मिलक में आशा बहुओं का सम्मान न मिलने से आक्रोश, ₹20 हजार मासिक मानदेय की मांग को लेकर सौंपा ज्ञापन
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मिलक तहसील की आशा कार्यकर्ताओं ने शहनाई मंडप में आयोजित कार्यक्रम में सम्मान न मिलने से नाराज होकर उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने ₹20 हजार मासिक मानदेय की मांग की है।

मिलक, रामपुर। स्वास्थ्य विभाग एवं बाल कल्याण विभाग के तत्वावधान में 21 सितंबर से 27 सितंबर तक आयोजित सात दिवसीय बहुउद्देशीय सेवा संकल्प अभियान के शुभारंभ अवसर पर शहनाई मंडप में आयोजित कार्यक्रम में आशा कार्यकर्ताओं की कथित अनदेखी का मामला सामने आया है। कार्यक्रम में सम्मान नहीं मिलने और उचित मान-सम्मान न दिए जाने से नाराज मिलक तहसील की आशा कार्यकर्ताओं ने उपजिलाधिकारी महोदय से मुलाकात कर एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने अपनी मांगों को प्रमुखता से उठाया है, जिसमें मुख्य रूप से उनके मानदेय में वृद्धि और कार्यक्रम में उन्हें उचित सम्मान न दिए जाने का मुद्दा शामिल है। आशा कार्यकर्ताओं ने इस बात पर गहरा रोष व्यक्त किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ होने के बावजूद उन्हें इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उपेक्षित किया गया।

आशा कार्यकर्ताओं की उपेक्षा का मामला

आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के कई लोगों को सम्मानित किया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की एक महत्वपूर्ण कड़ी मानी जाने वाली आशा बहुओं को किसी भी प्रकार का सम्मान नहीं दिया गया। उनका आरोप है कि उन्हें केवल कार्यक्रम में भीड़ बढ़ाने के उद्देश्य से बुलाया गया था, न कि उनके योगदान को स्वीकार करने के लिए। इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि उन्हें विभागीय स्तर पर हमेशा ड्रेस में आने के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन इस बार उन्हें निर्धारित वेशभूषा में भी नहीं बुलाया गया। यह स्थिति उनके मन में विभाग के प्रति असंतोष पैदा करती है और उन्हें यह महसूस कराती है कि उनके कार्यों को महत्व नहीं दिया जा रहा है।

आशा कार्यकर्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि वे स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ की हड्डी के समान हैं। गर्भवती महिलाओं की देखभाल से लेकर प्रसव संबंधी कार्यों में सहयोग, जच्चा-बच्चा की निरंतर निगरानी, टीकाकरण अभियान में सक्रिय भागीदारी, आभा आईडी और आयुष्मान कार्ड बनवाने जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण कार्यों में उनकी भूमिका निर्विवाद है। वे दिन-रात अपनी सेवाएं समर्पित करती हैं और कोविड-19 महामारी के कठिन समय से लेकर आज तक लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में अपना अमूल्य योगदान दे रही हैं। इन सभी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के बावजूद, उन्हें कार्यक्रम में सम्मान न मिलना उनके लिए अत्यंत निराशाजनक था।

₹2 हजार के मानदेय में कैसे चलेगा परिवार?

आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी सबसे बड़ी चिंता अपने मानदेय को लेकर व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उनकी जिम्मेदारियां और कार्यक्षेत्र लगातार बढ़ रहा है, लेकिन इसके बावजूद उन्हें मिलने वाला मानदेय उनकी अथक मेहनत और कार्य के अनुरूप बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने ₹2,000 के वर्तमान में बताए जा रहे मानदेय को अत्यंत अपर्याप्त बताया और इसे बढ़ाकर ₹20,000 प्रतिमाह किए जाने की जोरदार मांग की। उनका कहना है कि इस छोटी सी राशि में अपने परिवार का भरण-पोषण करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती है, जबकि वे समाज के स्वास्थ्य की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि उनके कार्य और परिश्रम के अनुरूप उन्हें उचित मानदेय, सम्मान और अधिकार दिए जाने चाहिए। यह केवल आर्थिक मांग नहीं है, बल्कि उनके द्वारा किए जा रहे महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य के प्रति सम्मान की भी मांग है। आशा कार्यकर्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि उन्हें केवल सेवा प्रदाता के रूप में नहीं, बल्कि स्वास्थ्य प्रणाली के एक अभिन्न अंग के रूप में देखा जाना चाहिए और उसी के अनुसार उन्हें सुविधाएं और सम्मान मिलना चाहिए।

उपजिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, ठोस कदम उठाने की मांग

कार्यक्रम के उपरांत, मिलक तहसील की समस्त आशा कार्यकर्ता सीधे उपजिलाधिकारी महोदय के कार्यालय पहुंचीं और अपनी मांगों के समर्थन में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह उनकी समस्याओं को गंभीरता से ले और उनके मानदेय को बढ़ाने तथा उन्हें उचित मान-सम्मान देने के संबंध में अविलंब ठोस कदम उठाए। ज्ञापन में आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी सेवा शर्तों में सुधार और उन्हें सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से इन मांगों को उठाती आ रही हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर कोई संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान प्रमुख रूप से लता पांडे, मां कली, ममता पांडे, शीतल पांडे, रोशन जहां, सरला देवी, तारावती, सत्यवती, यशोदा देवी, अनीता, सावित्री देवी, सरोज, ओमवती, राधा देवी, ममता देवी, शशि, ऋषि, विनीत सहित बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। उन्होंने सामूहिक रूप से अपनी आवाज बुलंद की और कहा कि वे तब तक चुप नहीं बैठेंगी जब तक उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं किया जाता।

आगे की रणनीति और चेतावनी

आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता और उन्हें पूरा करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक वे अपने मान-सम्मान और उचित मानदेय की मांग को उठाती रहेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को अनसुना किया गया तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगी, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के सुचारू संचालन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है, क्योंकि आशा कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

यह घटना दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके योगदान को पहचानना और उन्हें उचित सम्मान तथा आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए आवश्यक है। आशा कार्यकर्ताओं की मांगें जायज हैं और उन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी सेवाएं जारी रख सकें। रामपुर न्यूज़ इस मामले पर लगातार नजर बनाए रखेगा और आगे की जानकारी से अवगत कराता रहेगा।

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