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मिलक तहसील में निजी कर्मचारियों के दखल पर बार एसोसिएशन ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

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मिलक तहसील में निजी कर्मचारियों के दखल पर बार एसोसिएशन ने उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
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मिलक तहसील में सरकारी कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों में निजी कर्मचारियों की कथित भूमिका को लेकर विवाद गरमा गया है। बार एसोसिएशन ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की है।

रामपुर की तहसील मिलक में सरकारी कार्यालयों और राजस्व न्यायालयों के कामकाज में निजी कर्मचारियों के कथित हस्तक्षेप का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस गंभीर मुद्दे को लेकर बार एसोसिएशन मिलक ने संपूर्ण समाधान दिवस प्रभारी अधिकारी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार न्यायालय में निजी कर्मचारियों से सरकारी कार्य कराए जा रहे हैं, जिससे न्यायालय की गोपनीयता प्रभावित हो रही है। इसके अतिरिक्त, अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ दुर्व्यवहार और अवैध वसूली के भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बार एसोसिएशन ने इन सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

मिलक तहसील में निजी कर्मचारियों की भूमिका पर उठे सवाल

बार एसोसिएशन मिलक द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में विशेष रूप से तहसीलदार न्यायालय के रीडर/पेशकार सचिन कुमार सक्सेना पर निशाना साधा गया है। आरोप है कि सचिन कुमार सक्सेना ने अपने निजी सहायकों के रूप में लगभग पांच निजी कर्मचारियों को तैनात कर रखा है। अपने ज्ञापन में इन पांच निजी कर्मचारी के नाम भी लिख कर दिये है इन के माध्यम से न्यायालय के महत्वपूर्ण कार्य संपन्न कराए जा रहे हैं, जो कि नियमों के विरुद्ध है। इससे न केवल न्यायालय की गोपनीयता भंग हो रही है, बल्कि वादकारियों से अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। बार एसोसिएशन ने मांग की है कि इन सभी निजी कर्मचारियों को तत्काल सरकारी कार्यों से हटाया जाए और उनकी भूमिका की गहन जांच की जाए।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि ये निजी कर्मचारी न्यायालय परिसर में आने वाले अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ अक्सर दुर्व्यवहार करते हैं। गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। यदि कोई अधिवक्ता या वादी विरोध करता है, तो उसकी पत्रावलियों को जानबूझकर परेशान करने के उद्देश्य से रोका जाता है या विलंबित किया जाता है। यह स्थिति अधिवक्ताओं और आम जनता के लिए अत्यंत चिंताजनक है, जो न्याय की उम्मीद लेकर तहसील आते हैं।

लेखपालों और कानूनगो पर भी लगे निजी कर्मचारी रखने के आरोप

मामला केवल तहसीलदार न्यायालय तक ही सीमित नहीं है। ज्ञापन में रजिस्ट्रार कानूनगो कार्यालय में कार्यरत पवन कुमार पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि पवन कुमार पुरानी नामांतरण पत्रावलियों को अभिलेखागार रामपुर भेजने के बजाय मिलक में ही रख रहे हैं। जब अधिवक्ता या वादी इन पत्रावलियों को तलाशने जाते हैं, तो उनसे प्रति पत्रावली 200 से 500 रुपये तक की अवैध वसूली की जाती है। यह एक बड़ी राशि है, जो आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है और सरकारी प्रक्रिया को बाधित कर रही है।

इसके अतिरिक्त, मौके पर मौजूद कुछ अधिवक्ताओं, वादकारियों और स्थानीय लोगों ने भी अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि तहसील में निजी कर्मचारियों का हस्तक्षेप एक आम समस्या बन गई है। यह समस्या केवल न्यायालयों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि तहसील के अन्य महत्वपूर्ण कार्यालयों में भी व्याप्त है। लोगों का कहना है कि कुछ लेखपालों और कानूनगो (राजस्व निरीक्षकों) के पास भी निजी कर्मचारी काम कर रहे हैं। इन निजी कर्मचारियों के माध्यम से ही सरकारी कार्य कराए जाते हैं और इसके नाम पर आम जनता से बार-बार पैसे की मांग की जाती है। इस तरह की व्यवस्था से आम जनता और वादकारियों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बार एसोसिएशन ने इन सभी गंभीर शिकायतों पर तत्काल ध्यान देने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में तहसील में निजी कर्मचारियों की भूमिका की गहन और निष्पक्ष जांच कराना शामिल है। साथ ही, कथित अवैध वसूली के मामले की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। एसोसिएशन ने यह भी मांग की है कि पूरे तहसील परिसर की स्थलीय जांच कराई जाए, ताकि जमीनी हकीकत सामने आ सके।

प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार

बार एसोसिएशन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि निजी कर्मचारियों को सरकारी कार्यों से नहीं हटाया गया और अवैध वसूली पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो अधिवक्ता सड़कों पर उतरने से पीछे नहीं हटेंगे। यह स्थिति तहसील प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन गंभीर आरोपों और बार एसोसिएशन की मांगों पर क्या प्रतिक्रिया देता है। क्या तहसील में निजी कर्मचारियों की कथित व्यवस्था की निष्पक्ष जांच होगी? क्या अधिवक्ताओं और वादकारियों के साथ दुर्व्यवहार और अवैध वसूली करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही स्पष्ट होंगे, लेकिन फिलहाल मिलक तहसील में सरकारी कामकाज में निजी हस्तक्षेप का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों और अधिवक्ताओं को उम्मीद है कि प्रशासन इस मामले की गंभीरता को समझेगा और त्वरित कार्रवाई करेगा।

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