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रामपुर: भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) ने जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों के धरने का किया समर्थन, ध्वस्तीकरण आदेश का विरोध

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रामपुर: भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) ने जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों के धरने का किया समर्थन, ध्वस्तीकरण आदेश का विरोध
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रामपुर में भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) के जिलाध्यक्ष इमरान बाबा ने मौहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी पहुंचकर छात्रों के धरना-प्रदर्शन का समर्थन किया। उन्होंने प्रशासन के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश को गलत बताया।

रामपुर में भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) के जिलाध्यक्ष इमरान बाबा ने अपने साथियों और पदाधिकारियों के साथ मौहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी का दौरा किया। वहां उन्होंने छात्रों द्वारा चल रहे धरना-प्रदर्शन में किसान यूनियन की ओर से पूर्ण समर्थन व्यक्त किया। इस दौरान इमरान बाबा ने कहा कि प्रशासन द्वारा यूनिवर्सिटी के 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का जो आदेश जारी किया गया है, वह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा के इस महत्वपूर्ण संस्थान को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह युवा छात्र-छात्राओं के भविष्य का निर्माण करता है और हमारे देश का गौरव है।

जौहर यूनिवर्सिटी में छात्रों का धरना और किसान यूनियन का समर्थन

मौहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी में छात्रों का धरना प्रदर्शन पिछले कुछ समय से जारी है, जिसकी वजह प्रशासन द्वारा जारी किया गया 38 भवनों के ध्वस्तीकरण का आदेश है। इस मुद्दे पर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन छात्रों को मिल रहा है। इसी क्रम में, भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) के जिलाध्यक्ष इमरान बाबा ने यूनिवर्सिटी पहुंचकर छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि किसान यूनियन छात्रों के साथ खड़ी है और इस अन्यायपूर्ण आदेश का विरोध करती है।

इमरान बाबा ने अपने संबोधन में कहा कि यूनिवर्सिटी जैसे शैक्षणिक संस्थानों का महत्व बहुत अधिक होता है। ये संस्थान न केवल छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं, बल्कि समाज के विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे संस्थानों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई देश के भविष्य के लिए हानिकारक हो सकती है। उन्होंने प्रशासन से इस आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की और कहा कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

शिक्षा के मंदिर को राजनीति से दूर रखने की मांग

भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) के मंडल अध्यक्ष यशपाल यादव ने भी इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि जौहर यूनिवर्सिटी सभी धर्मों और जातियों के लोगों के लिए शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां सभी छात्र एक साथ मिलकर ज्ञान प्राप्त करते हैं और एक-दूसरे के साथ सद्भाव से रहते हैं। ऐसे पवित्र स्थान को किसी भी प्रकार की राजनीतिक रंजिश का शिकार नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह यूनिवर्सिटी को निशाना बनाने की बजाय, सभी प्रकार की ध्वस्तीकरण की कार्रवाई को तुरंत रोक दे।

यशपाल यादव ने आगे कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की प्रगति की नींव होती है। जब हम शैक्षणिक संस्थानों पर इस तरह के हमले करते हैं, तो हम अनजाने में ही सही, अपने देश के भविष्य को कमजोर कर रहे होते हैं। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि वे छात्रों की मांगों को सुनें और एक सकारात्मक समाधान निकालने का प्रयास करें, ताकि यूनिवर्सिटी का शैक्षणिक माहौल बना रहे और छात्रों का भविष्य सुरक्षित रहे।

किसानों की एकजुटता और भविष्य की रणनीति

इस समर्थन प्रदर्शन के दौरान भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) के कई प्रमुख पदाधिकारी और सैकड़ों किसान मौजूद रहे। इनमें जिलाध्यक्ष इमरान बाबा, मंडल अध्यक्ष यशपाल यादव, जिला महासचिव नरहत खांन, महामंत्री शम्भू गुप्ता, आसिफ अली, सलमान रजा, साजिद हुसेन, गुलफाम, सुलेमान, पंकज कुमार, पवन राजपूत, उपेंद्र कुमार सिंह, भोला बाबू, धीरेंद्र कुमार, शोएब मलिक, इकरार और अन्य कई किसान शामिल थे। किसानों की यह एकजुटता दर्शाती है कि वे समाज के विभिन्न मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने के लिए तैयार हैं।

किसानों ने इस बात पर भी जोर दिया कि वे भविष्य में भी ऐसे किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएंगे जो समाज के हित में न हो। उन्होंने कहा कि किसान केवल अपनी जमीन और फसलों के लिए ही नहीं लड़ते, बल्कि वे एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज के निर्माण में भी अपनी भूमिका निभाते हैं। जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों को दिया गया यह समर्थन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किसानों ने प्रशासन से एक बार फिर अनुरोध किया कि वह छात्रों की चिंताओं को समझे और यूनिवर्सिटी के भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश को रद्द करे।

यह घटना रामपुर में शिक्षा और राजनीति के बीच के जटिल संबंधों को भी उजागर करती है। ऐसे समय में जब देश युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान करने पर जोर दे रहा है, शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाना एक चिंताजनक प्रवृत्ति है। भारतीय किसान यूनियन (चौधरी) का यह कदम दर्शाता है कि स्थानीय समुदाय भी इन मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है और छात्रों के साथ खड़ा है। उम्मीद है कि प्रशासन इस समर्थन को देखते हुए और छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करेगा।

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