रामपुर में हज यात्रा पर भेजने का झांसा देकर जिला पूर्ति कार्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारी से 12.17 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पुलिस ने इमाम ख्वाजा अहमद कारी और इमरान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
रामपुर में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ हज यात्रा पर भेजने के नाम पर एक सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारी से लाखों रुपये की ठगी की गई है। जिला पूर्ति कार्यालय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए जमील अहमद को मोती मस्जिद के इमाम ख्वाजा अहमद कारी और उनके साथी इमरान ने हज यात्रा कराने का भरोसा दिलाया था। इस झांसे में आकर जमील अहमद ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, पेंशन की राशि, जमीन की बिक्री और अपनी पत्नी के गहने बेचकर आरोपियों को कुल 12.17 लाख रुपये दे दिए। जब आरोपियों ने फर्जी टिकट भेजे और यात्रा टालते रहे, तो पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। शहर कोतवाली पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर दोनों आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना सरकारी योजनाओं और धार्मिक यात्राओं के नाम पर होने वाले अपराधों की ओर इशारा करती है।
हज यात्रा का झांसा और ठगी की शुरुआत
मिलक क्षेत्र के गांव खाताकलां निवासी जमील अहमद, जो हाल ही में जिला पूर्ति कार्यालय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं, ने मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस अधीक्षक को एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई है। अपनी शिकायत में उन्होंने बताया कि वह अक्सर नोदरा चौकी स्थित मोती मस्जिद में नमाज पढ़ने जाते थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात मस्जिद के इमाम ख्वाजा अहमद कारी और उनके साथी इमरान से हुई। बातचीत के क्रम में, जमील अहमद ने उन्हें बताया कि वह और उनकी पत्नी फूल बी सरकारी कोटे से हज पर नहीं जा पा रहे हैं। इस बात को सुनकर, आरोपियों ने उन्हें एक निजी व्यवस्था के तहत हज यात्रा कराने का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बताया कि इस यात्रा का खर्च लगभग नौ लाख रुपये आएगा।
जमील अहमद, जो अपनी पत्नी के साथ हज पर जाने की तीव्र इच्छा रखते थे, आरोपियों की बातों में आ गए। उन्होंने अपनी पत्नी फूल बी के साथ हज पर जाने की उम्मीद में अपनी सारी जमा-पूंजी, पेंशन के पैसे, अपनी जमीन बेचकर और यहां तक कि अपनी पत्नी के सोने के कुंडल भी बेच दिए। मई-जून 2026 के बीच, उन्होंने आरोपियों को कुल नौ लाख रुपये नकद सौंप दिए। यह राशि उनकी वर्षों की मेहनत और बचत का परिणाम थी, जिसे उन्होंने एक पवित्र यात्रा के सपने को पूरा करने के लिए दांव पर लगा दिया। आरोपियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि उनकी यात्रा सुचारू रूप से संपन्न होगी।
दावत और अतिरिक्त खर्चों का सिलसिला
आरोपियों के कहने पर, जमील अहमद ने 14 मई को गांव और रिश्तेदारों के लिए हज पर रवाना होने से पहले एक बड़ी दावत का आयोजन किया। इस दावत पर ही करीब ढाई लाख रुपये का खर्च आया। यह खर्च न केवल यात्रा की तैयारी का हिस्सा था, बल्कि आरोपियों के कहने पर किया गया था, जिससे यह प्रतीत हो सके कि यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। इसके अलावा, आरोपियों ने पीड़ित के घर से 17 हजार रुपये कीमत का एक बकरा और करीब 50 हजार रुपये का अन्य सामान भी ले लिया। यह सब पीड़ित को यह विश्वास दिलाने के लिए किया गया था कि वे उसकी यात्रा को लेकर गंभीर हैं और हर संभव प्रयास कर रहे हैं।
फर्जी टिकट और ठगी का खुलासा
कुछ समय बाद, आरोपियों ने जमील अहमद के बेटे के व्हाट्सएप पर फ्लाइट टिकट भेजे। हालांकि, कुछ ही देर बाद उन्होंने उन टिकटों को डिलीट कर दिया और बहाना बनाया कि टिकट निरस्त हो गए हैं। जब बार-बार यात्रा की तारीखें बदली जाने लगीं और कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई, तो जमील अहमद को संदेह हुआ। उन्होंने एक कैफे पर जाकर भेजे गए टिकटों की प्रामाणिकता की जांच कराने का फैसला किया। कैफे में जब टिकटों की जांच की गई, तो पता चला कि वे पूरी तरह से फर्जी थे। इस खुलासे के बाद ही जमील अहमद को अपने साथ हुई भीषण ठगी का एहसास हुआ। उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई को एक ऐसे सपने के लिए गंवा दिया था जो कभी पूरा होने वाला नहीं था।
पैसे वापस मांगने पर धमकी
जब जमील अहमद को अपनी ठगी का पता चला, तो उन्होंने आरोपियों, इमाम ख्वाजा अहमद कारी और इमरान से अपने पैसे और उनके पास रखे पासपोर्ट वापस मांगे। लेकिन आरोपियों ने पैसे लौटाने से साफ इनकार कर दिया। जब पीड़ित ने विरोध किया और अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उसे पुलिस में फंसाने की धमकी भी दी। इस धमकी ने पीड़ित को और भी भयभीत कर दिया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी और न्याय के लिए अधिकारियों से गुहार लगाई। यह घटना दिखाती है कि कैसे कुछ लोग धर्म और विश्वास का दुरुपयोग कर निर्दोष लोगों को अपना शिकार बनाते हैं।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
पीड़ित जमील अहमद ने तुरंत मुख्यमंत्री पोर्टल और पुलिस अधीक्षक को इस धोखाधड़ी की शिकायत की। शिकायत के आधार पर, शहर कोतवाली पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी इमाम ख्वाजा अहमद कारी और उनके साथी इमरान के खिलाफ धोखाधड़ी, विश्वासघात और अन्य संबंधित धाराओं के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली है। पुलिस अधीक्षक अनुराग सिंह ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और पुलिस टीम मामले की गहन जांच कर रही है। पुलिस का प्रयास है कि जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित को उसका पैसा वापस दिलाया जा सके। यह मामला आम जनता के लिए एक चेतावनी है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति पर आसानी से भरोसा न करें, खासकर जब बड़ी रकम का लेन-देन शामिल हो।
यह घटना रामपुर क्षेत्र में चिंता का विषय बनी हुई है। लोग इस बात से आहत हैं कि धार्मिक यात्राओं के नाम पर भी ऐसी ठगी की जा सकती है। पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के प्रलोभन या झांसे में न आएं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस मामले की जांच जारी है और उम्मीद है कि जल्द ही आरोपियों को सजा मिलेगी और पीड़ित को न्याय मिलेगा। इस प्रकार की घटनाएं समाज में विश्वास को कमजोर करती हैं और लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता पर बल देती हैं।
