रामपुर रेलवे स्टेशन पर मिले 12 वर्षीय मूक-बधिर बालक लवकुश को चाइल्ड हेल्पलाइन की सक्रियता से उसके परिवार से मिलाया गया। बच्चे के हाथ पर लिखे फोन नंबर से हुई पहचान।
रामपुर। रामपुर रेलवे स्टेशन पर एक 12 वर्षीय मूक-बधिर बालक, जिसका नाम लवकुश कुमार है, को चाइल्ड हेल्पलाइन रामपुर की तत्परता और संवेदनशील प्रयासों के चलते उसके परिवार से सफलतापूर्वक मिला दिया गया है। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि बच्चे के दाहिने हाथ पर लिखे एक फोन नंबर के माध्यम से संभव हुई, जिसने उसके परिजनों से संपर्क स्थापित करने में मदद की। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, बालक को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया गया, जिससे बिछड़े परिवार का पुनर्मिलन हुआ। यह घटना बाल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी कार्यप्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती है।
घटना की शुरुआत 11 अगस्त 2026 को हुई, जब चाइल्ड हेल्पलाइन रामपुर को थाना जीआरपी रामपुर से एक सूचना प्राप्त हुई। इस सूचना के अनुसार, रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-01 पर गश्त के दौरान एक अज्ञात बालक मिला था, जो बोलने और सुनने में असमर्थ था। बच्चा अपनी पहचान या अपने घर के बारे में कोई भी जानकारी देने की स्थिति में नहीं था, जिससे उसकी पहचान करना एक चुनौती बन गया था। इस स्थिति को देखते हुए, जीआरपी ने चाइल्ड हेल्पलाइन से संपर्क साधा ताकि बच्चे को सुरक्षित आश्रय और सहायता प्रदान की जा सके।
मूक-बधिर बालक की पहचान कैसे हुई?
सूचना मिलते ही, जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती ईरा आर्या ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने जिला समन्वयक चाइल्ड हेल्पलाइन रामपुर, श्री निजामुद्दीन, को इस मामले में आवश्यक कदम उठाने के लिए निर्देशित किया। श्री निजामुद्दीन के मार्गदर्शन में, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम के सुपरवाइजर शिवम सिंह और मशकूर साहब ने तुरंत जीआरपी थाना पहुंचकर बालक की सुपुर्दगी की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद, टीम बच्चे को चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय ले गई ताकि उसकी देखभाल और आगे की कार्रवाई की जा सके।
चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय में, टीम ने बच्चे से उसके परिवार और घर के बारे में जानकारी निकालने का हर संभव प्रयास किया। हालांकि, बच्चे के मूक-बधिर होने के कारण, वह अपनी बात कहने या समझने में असमर्थ था, जिससे सीधे तौर पर कोई जानकारी प्राप्त नहीं हो सकी। इस स्थिति में, टीम ने बच्चे के शरीर की बारीकी से जांच की। इसी जांच के दौरान, बच्चे के दाहिने हाथ पर एक फोन नंबर लिखा हुआ पाया गया। यह नंबर बच्चे की पहचान और उसके परिवार तक पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुराग साबित हुआ।
परिवार से संपर्क और पुनर्मिलन
हाथ पर लिखे फोन नंबर को पाते ही, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने तुरंत उस नंबर पर संपर्क साधा। फोन पर बात करने वाले व्यक्ति ने बच्चे की पहचान लवकुश कुमार के रूप में की, जो संजय मुखिया का 12 वर्षीय पुत्र है। परिजनों से हुई बातचीत में यह भी पता चला कि लवकुश बिहार राज्य के जिला सहरसा का निवासी है। उसके पिता, संजय मुखिया, ने यह भी पुष्टि की कि उनका बेटा बोल और सुन नहीं सकता है। इस जानकारी के आधार पर, टीम ने बच्चे को उसके परिवार से मिलाने की प्रक्रिया शुरू की।
नियमानुसार, बच्चे को बाल कल्याण समिति, रामपुर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति ने बच्चे की सुरक्षा और देखरेख को प्राथमिकता देते हुए आदेश दिया कि जब तक उसके परिजन उपस्थित नहीं हो जाते, तब तक उसे जिला समन्वयक चाइल्ड हेल्पलाइन के संरक्षण में सुरक्षित रखा जाए। यह सुनिश्चित किया गया कि बच्चे को एक सुरक्षित और देखभाल भरा वातावरण मिले, जबकि उसके परिवार को सूचित करने और उन्हें रामपुर लाने की व्यवस्था की जा रही थी।
जिला प्रोबेशन अधिकारी की भूमिका
इस पूरे मामले में जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती ईरा आर्या की तत्परता और संवेदनशीलता अत्यंत सराहनीय रही। एक असहाय और मूक-बधिर बच्चे की स्थिति को समझते हुए, उन्होंने तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन को सक्रिय होने का निर्देश दिया। उनके कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में, चाइल्ड हेल्पलाइन टीम ने न केवल बच्चे को सुरक्षित आश्रय प्रदान किया, बल्कि उसकी पहचान स्थापित करने और उसे उसके परिवार से मिलाने के लिए अथक प्रयास किए। बच्चे के हाथ पर लिखे फोन नंबर जैसे छोटे से सुराग को ढूंढ निकालना और उसका प्रभावी उपयोग करना, इस पूरी प्रक्रिया की सफलता की कुंजी साबित हुआ।
श्रीमती ईरा आर्या के प्रयासों और चाइल्ड हेल्पलाइन टीम की सक्रियता के कारण ही बिहार के सहरसा निवासी 12 वर्षीय लवकुश अपने पिता से मिल सका। यह घटना बाल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार कार्यप्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। यह दर्शाता है कि कैसे सही समय पर की गई कार्रवाई और मानवीय दृष्टिकोण से किसी की जिंदगी में बड़ा सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। इस सफलता ने यह भी साबित किया कि सरकारी तंत्र और गैर-सरकारी संगठनों के बीच समन्वय कितना महत्वपूर्ण है।
आभार और प्रशंसा
बच्चे के पिता, संजय मुखिया, ने चाइल्ड हेल्पलाइन रामपुर की सक्रियता और सहयोग के लिए गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चाइल्ड हेल्पलाइन के सहयोग के बिना, अपने बिछड़े हुए बेटे तक पहुंचना उनके लिए अत्यंत कठिन होता। उन्होंने टीम के सदस्यों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जिन्होंने उनके बच्चे को सुरक्षित रखा और उसे वापस लाने में मदद की। यह पुनर्मिलन न केवल बच्चे के लिए बल्कि पूरे परिवार के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया।
रामपुर न्यूज़ डॉट कॉम की ओर से, हम जिला प्रोबेशन अधिकारी श्रीमती ईरा आर्या, जिला समन्वयक श्री निजामुद्दीन, सुपरवाइजर शिवम सिंह, मशकूर साहब, और चाइल्ड हेल्पलाइन रामपुर की पूरी टीम की इस संवेदनशील और सराहनीय पहल की हृदय से प्रशंसा करते हैं। उनके सामूहिक प्रयासों ने एक बच्चे को उसके परिवार से मिलाने का नेक काम किया है, जो समाज में सकारात्मकता और आशा का संचार करता है। यह घटना उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो बाल कल्याण और संरक्षण के लिए समर्पित हैं।
