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अधिवक्ताओं की मेहनत रंग लाई: आईजी रजिस्ट्री ने मानी खामियां, 04 जून का

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अधिवक्ताओं की मेहनत रंग लाई: आईजी रजिस्ट्री ने मानी खामियां, 04 जून का
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रामपुर से 11 अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल लखनऊ पहुंचा। आईजी रजिस्ट्री नेहा शर्मा ने नियमावली-2024 में खामियां स्वीकार करते हुए 04 जून 2026 का पत्र तत्काल प्रभाव से वापस लेने का निर्णय लिया है।

रामपुर के अधिवक्ताओं और लेखकों की अथक मेहनत आखिरकार रंग लाई है। केंद्रीय संघर्ष समिति के बैनर तले मेरठ से 11 सदस्यीय एक प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ पहुंचकर आईजी रजिस्ट्रेशन नेहा शर्मा से विस्तृत वार्ता की। इस प्रतिनिधिमंडल में ठाकुर विनोद राणा, मनोज गुप्ता, चौधरी वसीम एडवोकेट, फ़राज़ जी, जी.पी. सालोनिया जी, सुधीर मलिक जी, नवीन शर्मा जी, मनोज कुली सहित कई अन्य साथी शामिल थे। आईजी महोदया ने सभी की बातों को अत्यंत गंभीरता और ध्यानपूर्वक सुना। वार्ता के उपरांत, उन्होंने 04 जून 2026 के पत्र को तत्काल प्रभाव से वापस लेने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसकी प्रतिलिपि शीघ्र ही व्हाट्सएप ग्रुप में साझा की जाएगी।

यह निर्णय अधिवक्ताओं और लेखकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिन्होंने लंबे समय से नियमावली-2024 में मौजूद व्यावहारिक खामियों को उजागर करने के लिए संघर्ष किया था। आईजी महोदया ने स्वयं स्वीकार किया कि नियमावली में कई ऐसी कमियां हैं जो जमीनी स्तर पर काम करने वाले लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर रही हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन खामियों को दूर करने के लिए संशोधन का एक मसौदा तैयार किया जाएगा और उसे कैबिनेट को भेजा जाएगा। यह स्वीकारोक्ति अधिवक्ताओं के संघर्ष की जीत मानी जा रही है, जिन्होंने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा था।

नियमावली-2024 में संशोधन का आश्वासन

आईजी रजिस्ट्रेशन नेहा शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि नियमावली-2024 में पाई गई व्यावहारिक खामियों को दूर करने के लिए संशोधन का मसौदा जल्द ही तैयार कर कैबिनेट को भेजा जाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार अधिवक्ताओं और लेखकों की समस्याओं को समझती है और उन्हें दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह आश्वासन अधिवक्ताओं के लिए एक सकारात्मक संकेत है, क्योंकि यह दर्शाता है कि उनकी चिंताओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। इस संशोधन प्रक्रिया से भविष्य में काम करने वालों के लिए एक अधिक सुगम और प्रभावी प्रणाली स्थापित होने की उम्मीद है।

प्रतिनिधिमंडल ने आईजी महोदया से अनुरोध किया कि इस आश्वासन को लिखित रूप में भी जारी किया जाए ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की अनिश्चितता न रहे। इस पर उन्होंने बताया कि आज आवश्यक कार्यवश उन्हें कार्यालय से बाहर जाना पड़ा है, लेकिन संशोधन संबंधी पत्र कल तक निश्चित रूप से जारी कर दिया जाएगा। यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करेगा, जिससे अधिवक्ताओं को अपनी मांगों के पूर्ण होने का विश्वास मिलेगा। लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही वे अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।

हड़ताल की समाप्ति पर अंतिम निर्णय लंबित

प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जब तक संशोधन संबंधी लिखित आदेश जारी नहीं हो जाता, तब तक हड़ताल समाप्त नहीं की जाएगी। यह एक दृढ़ रुख है जो दर्शाता है कि अधिवक्ता अपनी मांगों को लेकर कितने गंभीर हैं। उन्होंने सभी साथियों से एकजुट रहने, किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने और केंद्रीय संघर्ष समिति के निर्देशों का पालन करने का आग्रह किया है। एकता को ही उनकी सबसे बड़ी शक्ति बताया गया है, और इसी एकता के बल पर वे अपनी लड़ाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाना चाहते हैं।

यह स्थिति रामपुर सहित पूरे प्रदेश के अधिवक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है। नियमावली में संशोधन से न केवल उनके काम करने की प्रक्रिया आसान होगी, बल्कि यह उनके अधिकारों और हितों की रक्षा भी करेगा। आईजी रजिस्ट्री द्वारा पत्र वापस लेना और खामियों को स्वीकार करना एक सकारात्मक कदम है, लेकिन अंतिम समाधान के लिए लिखित आदेश का इंतजार रहेगा। इस बीच, सभी संबंधित पक्षों से शांति बनाए रखने और समिति के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है। यह सुनिश्चित करेगा कि आंदोलन सुचारू रूप से चलता रहे और सकारात्मक परिणाम प्राप्त हों।

केंद्रीय संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन अधिवक्ताओं के अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण लड़ाई का प्रतिनिधित्व करता है। नियमावली-2024 में संशोधन की मांग जायज है और आईजी रजिस्ट्री का इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देना सराहनीय है। हालांकि, जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता, तब तक हड़ताल जारी रखने का निर्णय समझदारी भरा है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे। रामपुर न्यूज़ इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और अपने पाठकों को हर अपडेट से अवगत कराता रहेगा।

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