ब्रेकिंग न्यूज़
ब्रेकिंग न्यूज़ लोड हो रही है…ताज़ा अपडेट्स के लिए बने रहें…
Loading advertisement...
उत्तर प्रदेशब्रेकिंग

फर्जी पैन कार्ड मामले में आजम खान और बेटे अब्दुल्ला की सजा बढ़ी, अब 10-10 साल जेल

पढ़ने का समय: 4 मिनट484 बार पढ़ा गया
फर्जी पैन कार्ड मामले में आजम खान और बेटे अब्दुल्ला की सजा बढ़ी, अब 10-10 साल जेल
Loading advertisement...
शेयर करें:
शेयर करें:

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को फर्जी पैन कार्ड मामले में बड़ा झटका लगा है। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को दोनों की सजा बढ़ाते हुए अब 10-10 साल की कैद का आदेश दिया है। अदालत ने पहले सुनाई गई 7-7 साल की सजा में तीन-तीन साल की अतिरिक्त बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही दोनों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

रामपुर। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को फर्जी पैन कार्ड मामले में बड़ा झटका लगा है। रामपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट ने शनिवार को दोनों की सजा बढ़ाते हुए अब 10-10 साल की कैद का आदेश दिया है। अदालत ने पहले सुनाई गई 7-7 साल की सजा में तीन-तीन साल की अतिरिक्त बढ़ोतरी की है। इसके साथ ही दोनों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह फैसला राज्य सरकार की ओर से दाखिल उस याचिका पर सुनाया गया, जिसमें अदालत से सजा बढ़ाने की मांग की गई थी। सरकारी पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह मामला केवल दस्तावेजी त्रुटि का नहीं, बल्कि सरकारी पहचान पत्रों के दुरुपयोग और सुनियोजित फर्जीवाड़े से जुड़ा गंभीर अपराध है। अभियोजन पक्ष ने कहा कि ऐसे मामलों में कठोर सजा जरूरी है ताकि समाज में गलत संदेश न जाए और भविष्य में इस प्रकार के अपराधों पर रोक लग सके।
जानकारी के अनुसार, इससे पहले 17 नवंबर 2025 को एमपी-एमएलए कोर्ट ने आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई थी। उस समय अदालत ने दोनों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया था। सजा सुनाए जाने के बाद से दोनों रामपुर जेल में बंद हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि फर्जी पैन कार्ड के जरिए सरकारी दस्तावेजों में गलत जानकारी प्रस्तुत की गई थी। इसे सामान्य तकनीकी त्रुटि नहीं माना जा सकता। अदालत ने भी सरकारी पक्ष की दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सजा बढ़ाने का फैसला सुनाया।
इस पूरे प्रकरण में एक नया कानूनी मोड़ तब आया जब पूर्व मंत्री एवं स्वार टांडा सीट से पूर्व विधायक रहे काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां की ओर से भी एक रिवीजन याचिका दायर की गई थी। हालांकि, सेशन कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि राज्य सरकार की अपील पर सजा बढ़ाने से संबंधित सुनवाई होती है तो नवेद मियां को भी अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद इस मामले की सुनवाई तेज हुई और शनिवार को अदालत ने अंतिम फैसला सुनाते हुए दोनों की सजा में बढ़ोतरी कर दी। अदालत के इस फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेताओं ने इस फैसले पर नाराजगी जताई है, जबकि विपक्षी दल इसे कानून की बड़ी कार्रवाई बता रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, बचाव पक्ष अब इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह मामला फिर से हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंच सकता है। फिलहाल अदालत के आदेश के बाद आजम खान और अब्दुल्ला आजम को रामपुर जेल में ही रहना होगा।
आजम खान पहले भी कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं और उनके खिलाफ विभिन्न अदालतों में कई मुकदमे चल रहे हैं। वहीं, अब्दुल्ला आजम भी कई कानूनी मामलों का सामना कर रहे हैं। फर्जी दस्तावेजों से जुड़े इस मामले में अदालत का यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टैग:उत्तर प्रदेशरामपुर न्यूज़उत्तर प्रदेश
Loading advertisement...